मुझे आपको यह
बताना ज़रूरी है….

मुझे आपको यह बताना ज़रूरी है….
क्या आप मुझे आपका पांच मिनट दे सकते है ? यह संदेश आपको बताने के लिए सिर्फ़ पांच मिनट लगेंगे । आपके पुरे जीवन में ऐसी एक महत्वपूर्ण बात शायद आपने सुनी नहीं होगी । आपका अस्तित्व इस संदेश पर निर्भर करता है । आप यह संदेश स्वीकार या अस्वीकार कर सकते है । परुंतु यह संदेश पढ़ने के बाद ही आप अपना निर्णय ले । मैं विश्वास करता हु कि यह संदेश आपके जीवन के लिए लाभदायक होगा । अब मैं अपने विषय की ओर मुड़ता हूँ । आइए हम इस दुनिया के सृष्टि से शुरुआत करते है ।

हम इस दुनिया में कैसे आए ??

यह दुनिया जिसे हम अपना घर मानते है, उसे सनातन के सच्चे परमेश्वर ने बनाया है । यह धरती जिस में हम रहतें हैं और आकाश मंडल जो हमारे समज से भी परे हैं, उसको सनातन के परमेश्वर ने बनाया हैं। लेकिन, मनुष्य सारे प्राणियों से विशेष और अलग है, क्योंकि मनुष्य को परमेश्वर ने अपने स्वरूप में ही बनाया है, और हम परमेश्वर के प्रेम को अनुभव कर सकता है । हम मनुष्य इसलिए भी विशेष है क्योंकि, हम सोच सकते है, समझ सकते है और निर्णय ले सकते है । हम मनुष्य परमेश्वर के सर्वोत्तम रचना है । दुख की बात यह है कि, मनुष्य की यही विशेषता उसके गिरने का कारण भी बन गई । हमने परमेश्वर पर शक किया, उनके आज्ञाओं न माना और उनके अच्छाई को धिक्कार दिया । परमेशवर ने पहला पुरुष – आदम और पहली स्त्री – हव्वा की सृष्टि की । लेकिन उन्होंने परमेश्वर की आज्ञा को नहीं मानी और परमेश्वर के साथ का पवित्र रिश्ता टूट दिया । मनुष्य परमेश्वर से जुदा हो गया और पाप उसके जीवन पर हावी हो गया । मनुष्य का रास्ता नरक की तरफ मुड़ गया, जहां शैतान निवास करता है । अब हम समझ पाते है कि मनुष्य की दुष्टता दिन-ब-दिन क्यों बढ़ती जा रही है ।

हम कहाँ जा रहे है ?

निसंदेह, मनुष्य अपना जीवन पाप में ही बिता रहा है, पर यह सोचना ज़रूरी है कि उसकी यह यात्रा कहाँ खत्म होगी? पवित्र बाइबिल इसका उत्तर देता है: “सबने पाप किया है और परमेश्वर की महिमा से अलग हो गए है ।” इसका मतलब यह है कि पापियों का अंत नरक में होगा, जहाँ पर उसका रिश्ता परमेश्वर से हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा। । नरक वह जगह है जहाँ दुःख, दर्द और गुलामी हमेशा होगी । मनुष्य ने खुद पाप का रास्ता चुन लिया है । परुंतु परमेश्वर नहीं चाहता है कि उसके सर्वोत्तम सृष्टि को यह सज़ा मिले। लेकिन समस्या यह है कि मनुष्य पापी होने के कारण, पवित्र परमेश्वर की उपस्थिति में प्रवेश नहीं कर सकता । परमेश्वर के न्याय के अनुसार हर एक पापी को सज़ा मिलेगी । यह सत्य है कि मनुष्य हमेशा से परमेश्वर के करीब आना चाहता है। वह कुछ ऐसे मार्ग अपनाता है, जैसे, तपस्या, तीर्थ यात्रा, दान पुण्य इत्यादि। परुंतु हमें इन उपायों से कोई फायदा नहीं मिलता है। यह सारी उपाय पवित्र परमेश्वर और पापी मनुष्य के रिश्ते को जोड़ नहीं सकती।

अब हम क्या करें ? ?

“मार्ग और सत्य और जीवन मैं ही हूँ; (यूहन्ना 14:6)

मनुष्य को परमेश्वर के करीब जाने का प्रयत्न हमेशा से असफल रहा, परन्तु परमेश्वर ने स्वयं अपना हाथ मनुष्य की ओर बढ़ाया और उसे अपने पास लाया । परमेश्वर दो हज़ार साल पहले उनके पुत्र प्रभू येशु मसीह को आपके पापो के लिए क्रूस पर बलिदान कर दिया । यह बलिदान जेरूसलम में गोलगोठा पर्वत पर पूरा हुआ । वह दफनाया गया पर फिर से तीसरे दिन जीवित हुआ, और उसने शैतान, पाप और मृत्यु को हरा दिया । उनका जन्म, जीवन, मृत्यु और जी उठना बेमिसाल है । उद्धार का रास्ता जो प्रभु यीशु मसीह ने दिखाया है वह विशेष है । परमेश्वर ने ऐसा उपाय किया कि मनुष्य के साथ उसका टूटा हुआ संबंध स्थापित हो जाए । यह मार्ग किसी विशेष जाति, धर्म, अमीर या गरीब के लिए नहीं है, वरण सब के लिए यह मार्ग खुला है ।

अब मेरा कर्तव्य क्या है ?

अब हमारी ज़िम्मेदारी बनती है कि परमेश्वर ने हमे जो उद्धार दिया है उसे दीनता से स्वीकार करें। हमे स्वीकार करना है कि हम एक पापी है और हमको अपने पापों से पश्चाताप करना है । हम यह भी विश्वास करें कि यीशु मसीह मेरे सारे पापों का बोझ क्रूस पर उठा लिया, मारा गया और तीसरे दिन जीवित हुआ । परमेश्वर का पुत्र प्रभु यीशु मसीह को अपने जीवन में आमंत्रित करे । आप जहाँ पर भी हो, यह निर्णय एक छोटी सी प्रार्थना के द्वारा ले सकते है । यह कार्य आपको बहुत सरल लगेगा परुंतु मैं आपको बताना चाहता हु कि विश्वास के द्वारा लिया गया यह छोटा सा कदम आपको अनंत-काल का जीवन दिला सकता है । प्रिय मित्र, क्या आप परमेश्वर के साथ संबंध बनाना चाहते है? स्वर्ग के वारिस बनना चाहते है? अनंत काल का जीवन प्राप्त करना चाहते है और परमेश्वर की कृपा पाना चाहते हु? यह ज़रूरी है कि आप पहले प्रभु यीशु मसीह को अपना उद्धारकर्ता मान ले। यह एक ही रास्ता है जो परमेश्वर ने मनुष्य के लिए बनाया है, जिससे हम अपने सृष्टिकर्ता के पास पहुँच सकते है । लेकिन परमेश्वर के योजना के खिलाफ बगावत करना या उसके दिए हुए मुफ़्त के उद्धार को ठुकराना, बहुत ही गलत होगा । हम सब इस दुनिया में थोड़े ही समय के लिए है । हम नहीं जानते कि हमारा जीवन कब समाप्त होगा। इस जीवन में हमे यह सच्चाई जानना और सुनिश्चित करना पड़ेगा कि हम परमेश्वर से दूर नहीं परुंतु हमेशा के लिए उनके साथ रहेंगे । इस जीवन में हमे बहुत सारे परेशानिया का सामना करना पड़ सकता है और हम कई सवाल भी उठा सकते है । परन्तु हम अपना जीवन परमेश्वर को सौंप दे और वह हमे नया जीवन देगा । हो सकता है कि हम फिर कभी न मिलें, परुंतु मुझे ख़ुशी है कि मेरे जीवन की सब से बड़ी सच्चाई मैंने आपके साथ बाँट दी है । मैं आशा करता हु कि आप सही निर्णय लेंगे । याद रखे कि इस निर्णय का प्रभाव सिर्फ इस जीवन में ही नहीं परुंतु, मृत्यु के बाद के जीवन में भी होगा । मैं तहे दिल से आपको स्मरण दिलाना चाहता हु कि परमेश्‍वर आपसे बहुत प्रेम करते है । कृप्या उनके इस अनोखे प्रेम को ना ठुकराना ।

कुछ पंक्तियों पवित्र शास्त्र से

क्योंकि परमेश्‍वर ने जगत से ऐसा प्रेम रखा कि उसने अपना एकलौता पुत्र दे दिया, ताकि जो कोई उस पर विश्वास करे, वह नाश न हो, परन्तु अनन्त जीवन पाए।.
(यूहन्ना 3:16)
जो प्रेम परमेश्‍वर हम से रखता है, वह इससे प्रगट हुआ कि परमेश्‍वर ने अपने एकलौते पुत्र को जगत में भेजा है कि हम उसके द्वारा जीवन पाएँ। प्रेम इसमें नहीं कि हमने परमेश्‍वर से प्रेम किया पर इसमें है, कि उसने हम से प्रेम किया और हमारे पापों के प्रायश्चित के लिये अपने पुत्र को भेजा।.
(1यूहन्ना 4:9, 10)
यीशु ने उससे कहा, “मार्ग और सत्य और जीवन मैं ही हूँ; बिना मेरे द्वारा कोई पिता के पास नहीं पहुँच सकता।. (यूहन्ना 14:6) कि यदि तू अपने मुँह से यीशु को प्रभु जानकर अंगीकार करे और अपने मन से विश्वास करे, कि परमेश्‍वर ने उसे मरे हुओं में से जिलाया, तो तू निश्चय उद्धार पाएगा।.
(रोमियो 10:9)